नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई (Urgent Hearing) से जुड़े नियमों में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी 'अत्यंत आवश्यक' मामले का उल्लेख (Mentioning) केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष ही किया जा सकेगा। शीर्ष अदालत ने इस संबंध में एक नया परिपत्र (Circular) जारी कर स्पष्ट किया है कि अब इस प्रक्रिया में किसी अन्य वरिष्ठ जज की भूमिका नहीं होगी।
क्या है नया नियम?
6 अप्रैल को जारी इस नए आदेश के मुताबिक, ऐसे मामले जिनमें सुनवाई के लिए इंतजार करना संभव नहीं है, उन्हें केवल अदालत संख्या 1 (CJI की बेंच) के सामने पेश किया जा सकेगा।
- अहम बदलाव: अब यदि मुख्य न्यायाधीश किसी संविधान पीठ की अध्यक्षता में व्यस्त भी हैं, तब भी अर्जेंट मामलों का उल्लेख उन्हीं के सामने करना होगा।
- पुरानी परंपरा खत्म: पहले के नियमों के अनुसार, यदि मुख्य न्यायाधीश उपलब्ध नहीं होते थे या व्यस्त होते थे, तो वकील कोर्ट के सबसे सीनियर जज (Number 2 जज) के सामने जाकर मामले की तत्काल सुनवाई की गुहार लगाते थे। अब अन्य किसी भी पीठ के समक्ष ऐसे मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी।
CJI सूर्यकांत ने 'न्यायिक ढांचे' पर दिया जोर
नियमों में इस बदलाव के बीच, हाल ही में CJI सूर्यकांत ने तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान न्यायपालिका की मजबूती पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा:
"देश भर में अदालती परिसरों का निर्माण और न्यायिक ढांचे को मजबूत करना अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है। सभी राज्य सरकारें अब इसे एक गंभीर संवैधानिक दायित्व के रूप में देख रही हैं।"
CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान निर्माताओं का मुख्य लक्ष्य 'न्याय तक सबकी पहुँच' सुनिश्चित करना था, और इसीलिए हर राज्य में उच्च न्यायालय की स्थापना की गई। उन्होंने इसे केवल कानूनी जरूरत नहीं, बल्कि गणतंत्र की एक गंभीर प्रतिबद्धता बताया।

